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Showing posts from February, 2021

सुख और दुख

    सुख और दुख क्या है सुख और दुख में से कोई भी शाश्वत नहीं है अर्थात कायम नहीं है दोनों ही एक समय पर विलीन हो जाते हैं हमें किसी सुख का अनुभव थोड़े समय तक ही होता है और दुख का अनुभव भी थोड़े समय तक ही होता है  जब तक हम किसी वस्तु व्यक्ति या पद को सुख मानेंगे तो हमें कभी भी सुख मिल ही नहीं सकता क्योंकि सुख कभी भी पाया नहीं जा सकता आज तक हम सुख और दुख को कभी जान ही नहीं सके सुख और दुख मन के एक भाव है जिस वस्तु में हमारी रुचि है वह वस्तु हमें प्राप्त हो जाए तो हमें सुख की अनुभूति होती है और अगर वही वस्तु हमें प्राप्त ना हो ऐसी कोई वस्तु जो हम स्वीकारना ना चाहते हो वह हमें प्राप्त हो जाए तो हमें दुख की अनुभूति होती है सुख और दुख दोनों में से कोई भी सत्य नहीं है कहने का मतलब है कि जो हमें लगता है कि "यह हमारा सुख है और यह हमारा दुख है तो दोनों ही हमारे भ्रम है" अगर वास्तव में कोई हमारे लिए सुख होता तो वह सबके लिए सुख होता और हमारे लिए जो दुख होता वह सबके लिए दुख होता पर ऐसा नहीं है  क्योंकि व्यक्ति के अनुसार व्...

समय का महत्व

                                               जब हम स्कूल में थे तब हमें हमारे शिक्षक हमें समय  का महत्व बताया करते थे। हर कोई समय का महत्व जानता है पर उस पर चल नहीं सकता ऐसा क्यों होता है क्योंकि हम वास्तविकता को स्वीकारना नहीं चाहते जो कार्य जिस समय पर होता है वही समय पर होना चाहिए।                                               जो व्यक्ति समय का महत्व नहीं समझता उसे अवश्य ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय कभी भी वर्तमान में अपना प्रभाव नहीं बताता परंतु भविष्य में ही उसका प्रभाव मालूम पड़ता है और बाद में हमें पछतावा होता है कि अगर हम समय के महत्व को जान गए होते तो आज ऐसा ना होता।                   ...

अवचेतन मन

                                                         आज का मुख्य मुद्दा है हमारा अवचेतन मन। अवचेतन मन हमारे शरीर का एक ऐसा हिस्सा है जिसे कोई आज तक पूरे पूरा जान नहीं सका। हमारा अवचेतन मन बहुत ही शक्तिशाली है। अब हमें यह प्रश्न होगा कि यह अवचेतन मन है क्या ? जिसने जान लिया कि अवचेतन मन क्या है उसने सफलता की कुंजी पा ली समझो, बल्कि अवचेतन मन को समझना ही सफलता की कुंजी है।                                                          हमारी पुरानी देखी हुई कोई चीज या सुना हुआ कोई शब्द अवचेतन मन ग्रहण कर लेता है और बाद में हमें इसका एक निश्चित परिणाम प्राप्त होता है।           ...